मानव सभ्यता की तकनीकी उपलब्धियों के कारण आज संपूर्ण विश्व एक दूसरे से परस्पर जुड़ा हुआ है | विभिन्न देशो , समुदायो की सभ्यता ,संस्कृति ,ख़ान-पान एवं परंपराए आज देश विदेश मे ई-तकनीक के ज़रिए ख्याति प्राप्त कर रही है |
इन सभ्यताओ व संस्कृतियों का मूल आधार है -शिक्षा , एक ऐसी परंपरा जो आदि काल से आधुनिक काल तक मनुष्यों का सर्वांगीण विकास करते आ रही है |
प्राचीन काल से ही छात्र विभिन्न देशो के संस्थानो एवं विश्वविद्यालायो मे शिक्षा ग्रहण करने पलायन करते रहे है जिससे शिक्षा का प्रसार प्रचार हुआ है, तथा ये परंपरा आज तक चली आ रही है | बात की जाए भारतीयों की तो विश्व को गणित व अंतरिक्ष विज्ञान देने वाले इस देश के छात्र हज़ारो की संख्या मे उच्च शिक्षा ग्रहण करने अमेरिका जाते है |
गणित व भौतिक विज्ञान में तो ये आकड़ा और भी ऊँचा है | आइ. आई .टी . मुंबई का छात्र होने के कारण मे प्रत्यक्ष रूप से
अपने मित्रो को अमेरिका जाते एवं अत्याधुनिक अनुसंधान करते देखता हूँ |
अमेरिका शोधकार्य पर विशेष रूचि रखता है तथा संभावनाओ पर पूर्ण उत्साह से अनुसंधान करता है अगर बात तकनीकी क्षेत्र की की जाए तो अमेरिका अपने प्रतिद्वन्दी राष्ट्रो से कहीं आगे है विश्व स्तर के मशीन उपकरण ,सैकड़ो शोधपत्र प्रकाशित करने वाले प्रोफेसर एवं एम.आई.टी स्टेनफोर्ड जैसे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय इसके उदाहरण है |
बात भारत की की जाए तो हमारी बुनियादी शिक्षा पर सरकार ज़्यादा रूचि दिखती है परंतु यह सर्वविदित है की भारतीय छात्र अत्यंत कुशल तथा मेधावी होते हैं | भारतीय छात्रो ने अपनी काबिलियत से सम्पूर्ण विश्व मे पहचान बनाई है अमेरिका मे भरतीय छात्रो की संख्या अच्छी है, तथा ये वे छात्र है जो भारत के श्रेष्ठ संस्थानो से स्नातक है | भारतीय छात्रो ने निर्विवादित रूप से अमेरिका की अर्थव्यवस्था मे योगदान दिया है, आप देख सकते है की गूगल माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियो के प्रमुख पदो पर भारतीय ही है |
यह कहना ग़लत होगा की विदेशी शिक्षा के बाद भारतीय अपने देश "भारत" को भूल जाते है | आई. आई. टी , आई.आई.एम
आई.आई.एस.सी मे पढ़ाने वाले प्रोफेसर इसका अनदेखा द बेजोड़ उदाहरण है | इन प्रोफ़ेसरो का छात्रो को विश्वस्तरीय शिक्षा देना उन्हे उच्च शिक्षा के काबिल बनाना ताकि वे उनकी विरासत संभाल सके किसी "देशभक्ति" से कम नही है |
भारत-अमेरिका एक दूसरे के पूरक है एक के पास तकनीक कई तो दूसरे के पास उसी तकनीक से कमाल करने वाले दिमाग़ |
परंतु इसके लिए दोनो देशो को कदम से कदम मिलने होंगे | भारतीय छात्रो को बहुत कम अवसर मिलते है अमेरिका जाने के ,इसका प्रमुख कारण है छात्रवृत्ति व सरकारी सहायता न मिलना | अमेरिका मे शिक्षा किसी आम मध्यमवर्गीय भारतीय के बस की बात नही है ,मेरे ऐसे कई मित्र है जो अत्यंत मेधावी है परंतु इन्ही सहायतों के ना मिलने पर इससे वंचित हो गये है|
अमेरिकी सरकार को चाहिए की वे भारत एवं अन्य देशो के छात्रो के लिए अध्यापन शुल्क व वीज़ा की जटिलताओ मे कटौती करे तथा अपने शिक्षातंत्र मे और अवसर बढ़ाए | भारत सरकार के लिए मेरा ये मानना है की हमारी सरकार अपने बज़ट का एक बड़ा हिस्सा सेना व रक्षातंत्र मे व्यय करती है ,अगर इसका दस प्रतिशत भी भारतीय छात्रो के तकनीकी अनुसंधान पे निवेश किया जाए तो वही छात्र कुछ वर्षो बाद हमारे रक्षातंत्र मे तकनीकी योगदान देंगे जो हमारे देश मे एक नयी क्रांति लाएगा | सोचिए हमारे देश के नौजवान अन्य किसी देश की सहायता के बिना अपना स्वदेसी लड़ाकू विमान , मिसाइल एवं परमाणु संयंत्र बना सके तो यह पूरे भारतवर्ष के लिए कितने गर्व की बात होगी |
तकनीक मनुष्य के कार्यो को सरल करती है और अगर सही हाथों मे हो तो विश्वशांति,पर्यावरण,जीवन-यापन अर्थव्यवस्था व कई मसले आसानी से सिद्ध हो सकते है | भारत और अमेरिका को शिक्षा व तकनीक के क्षेत्र मे परस्पर मैत्रीपूर्ण संबंध रखने होंगे ताकि दोनो देश एक आत्मविश्वासी समाज और एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सके |
धन्यवाद !!!!